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बुधवार, 30 सितंबर 2009

भगत सिंह तुम वापस आओ


बुनियादी तौर पर हम सब दुनिया को बेहतर शक्ल में देखना चाहते हैं. लेकिन जब बात ब्यवहारिकता की आती है तो हमें सबसे पहले सिर्फ हम और हमारे साथ वाले दिखते हैं. दरअसल ऐसा करते वक्त हम खुद को पैदाइशी बुद्धिमान मानकर ठेठ दुनियादारी का फ़र्ज़ निभा रहे होते हैं. लेकिन सच ये है कि ये दुनिया सिर्फ हम जैसे दुनियादारों की बदौलत नहीं चलती बल्कि इसे चलाने और बेहतर बनाने के लिए कुछ ऐसे जूनूनियों की जरुरत पड़ती है जो अपने खून के ईधन से क्रांति का पहिया आगे बढा सकें. २७ सितम्बर को ऐसे ही एक महावीर जुनूनी का जन्मदिन है.

जी हाँ ठीक पहचाना आपने, सरदार भगत सिंह!

बचपन में खेत में बंदूकें बोने वाला ये महान क्रन्तिकारी आज भी हमारे देश में परिवर्तन के हामी लाखों नौजवानों की प्रेरणा का स्रोत है. भगत सिंह ने सिर्फ अंग्रेजो से आजादी का नहीं बल्कि भूख, गरीबी और असमानता से मुक्ति का सपना देखा था. हमें आज़ादी तो मिली लेकिन भगत सिंह का सपना आज भी अधूरा है. आज के नौजवान होने के नाते ये जिम्मेदारी हमारी भी है के हम भगत सिंह के उस सपने को साकार करें. हम जिस किसी पेशे में हैं वहां चीजों को बेहतर बनाने के कोशिश करें. भूख, गरीबी और असमानता को मिटाने के लिए जो कुछ कर सकते हैं, जरुर करें. हमारी ओर से भगत सिंह को यही सच्ची श्रधान्जली होगी

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