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सोमवार, 28 दिसंबर 2009

मानो या ना मानो हम सब बेहया है

अजय कुमार सिंह

कोटला में घटिया पिच की वजह से मैच रद्द करना पड़ा तो केन्द्र सरकार को हरियाणा के 'घटिया' पूर्व डीजीपी एसपीएस राठौर से राष्ट्रपति मेडल वापस लेना पड़ा। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे और अभी आंध्र प्रदेश के लाट साहब पूरी जवानी नहीं पकड़ाए लेकिन बुढ़ापे में वही हरकतें छीछालेदर का कारण बन गईं। सत्ता लोलुप भाजपाइयों ने सिबू सोरेन को मुख्यमंत्री बनाने का एलान कर दिया तो चार सौ से ज्यादा करोड का घोटाला करके भी मधु कोड़ा अपनी बीबी के साथ चुनाव जीत गए। क्या अब भी कोई कसर बाकी है ये साबित करने के लिए कि हम सब भारतवासी बेहयाई के मामले में बिल्कुल भाई-भाई हैं। मानो या ना मानो-हम सब बेहया हैं भाई। अमेरिका ने हमे अच्छा पहचाना। तभी तो हेडली के मामले में भी साफ-साफ कह दिया कि कम से कम दो सौ साल बाद वो हेडली को भारत के हवाले करने के बारे में सोचेगा। हम हैं ही इसी लायक। क्या आपको याद है कि पुरुलिया में विमान से हथियार गिराने वालों में से एक अमेरिकी नागरिक को हमने अमेरिका के एक इशारे पर बाइज्ज़त छोड़ दिया था। लेकिन अमेरिका को क्या पड़ी है कि हमारे मुंबई में २६ नवम्बर २००८ को तबाही मचाने की साजिश में शामिल हेडली को हमारे हवाले करे। हम ही कौन सा उसे तब पकड़ पाए जब वो मुंबई से लेकर गोवा और दिल्ली तक लड़कियों के साथ घूमता रहा। भारतियों को अमेरिका से भगाने सम्बन्धी ओबामा के विचारों से भला कौन नहीं वाकिफ। लेकिन ओबामा राष्ट्रपति क्या बने हमारे यहाँ ७० साल के मुलायम और ५३ साल की मायावती भी ख़ुद को 'उभरता हुआ ओबामा' बताने लगीं। कुछ ही दिन हुए जब ओबामा चाइना गये और मुह फाड़कर बोल आये कि चाइना को कश्मीर के मसले पर मध्यस्थता करनी चाहिए "। चाइना ने लद्दाख में जरा सी गर्मी दिखाई और नरेगा के तहत बन रही सड़क रूक गई। एक न्यूज़ चैनल पर मैंने देखा, 'ड्रैगन हमारी सड़क से डर गया।' क्या अब भी यकीन नहीं होता कि हम सब बेहया हैं तो आईये देखिये कि किस तरह मुंबई एटीएस के पूर्व प्रमुख हेमंत करकरे की शहादत का सच सामने ना आने पाए इसलिए उनकी बुलेट प्रूफ जाकेट गायब कर दी गई। किस तरह एक सफाई कर्मचारी ने अदालत में कहा कि उसने ये जाकेट कूड़ेदान में दाल दी थी। आइये जाने कि किस तरह जेसिका लाल का हत्यारा मनु शर्मा दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीछित की मेहरबानी से पैरोल पर छूटा और फ़िर अय्याशी में भिड गया। जरा जानिए कि कैसे सीबीआई ने निठारी में छोटे-छोटे बच्चों से दुष्कर्म करके उन्हें कुकर में पका कर खा जाने वाले ड्रैकुला मोहिंदर सिंह पंधेर को बचा लिया। इसीलिए ना क्योंकि पंधेर एक दिन में एक लाख से ज्यादा रुपये कमाता है। अब भी अगर आपको हम सब के बेहया होने पर शक हो तो आज़ादी के बाद से आज तक बने जांच आयोगों की कथनी-करनी पर नज़र डाल लीजिये। अरे दूर क्यों जाते हैं अपने काले चश्मे वाले लिब्राहन साहब को देखिये ना। कैसे सालों अयोध्या काण्ड की जाँच के नाम पर दाना-पानी उठाते रहे और जब रिपोर्ट दी तो उसमे अयोध्या काण्ड के बजाये किष्किन्धा काण्ड का विवरण था। पता ही नहीं चला कि कौन कहाँ कूदा, किसने किससे क्या कहा और आखिरकार जो कुछ हुआ वो किसके कर्म या कुकर्म का प्रतिफल था। हरी अनंत हरी कथा अनंता। हमारी बेहयाई के नमूनों की कोई कमी नहीं। हर प्रदेश , हर जिला, हर मोहल्ले और हर गाँव में हमारी बेहयाई के बेशुमार नमूने बिखरे पड़े हैं। गोरखपुर मंडल में एन्सफ्लाईटिस से पिछले ३१ सालों में ५० हज़ार से ज्यादा बच्चे मर गए। विश्व बैंक गोबर की खाद वाली उसी जैविक खेती के लिए एनजीओज को अरबों रुपये अनुदान-क़र्ज़ दे रहा है जो सदियों से हमारी परम्परा में शामिल रहा है। श्वशुर पतोहू की कौन कहे बाप-बेटी, भाई-बहन के रिश्ते कलंकित हो रहे हैं। क्या अब भी कोई सबूत बाकी है कि हम सब बेहया हैं। अगर आपको अब भी कोई सुबह हो तो ३१ दिसम्बर की रात किसी भी शहर के किसी भी होटल में चले जाइएगा । बावजूद इसके कि हमारे यहाँ ७० फीसदी लोग भूखे-नंगे हैं बड़ी बेहयाई हममे से ३० फीसदी भरे-पूरे लोग एक-एक सीट बुक कराने के लिए हज़ारों खर्च करते नज़र आ जायेंगे। ऐसी जगहों पर बच्चे-बूढ़े-जवान हर उमर के लोग अधनंगी नाचती लड़कियों को देखकर मस्ती में झूमते नज़र आ जायेंगे। उनकी हरकतें देखकर शायद आपको यकीन हो जाए कि हम सब बेहया हैं।

1 टिप्पणी:

  1. छोड़िए हम सब क्यों .. वे हैं। एक अच्छे आलेख के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद
    आपको नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।

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