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बुधवार, 2 दिसंबर 2009

होलिया चलो




अगले साल यानि २०१० की शुरुआत बेहतर ढंग से करने के लिए हम सब एक जनवरी को कुशीनगर और गोरखपुर की बिल्कुल सीमा पर स्थित होलिया गांव जा रहे हैं। वहां हमें श्रमदान करना है लेकिन उसका रूप क्या होगा ये वहीँ जाकर पता चलेगा। एन्सेफलाईटिस उन्मूलन अभियान के चीफ कम्पेनर डॉ आर.एन.सिंह ने इससे ज्यादा ना तो कुछ बताया है और ना ही हमने पूछा है। मोबाइल पर बस इतनी ही बात हुई है कि चाहे धरती इधर से उधर हो जाए एक जनवरी २०१० को होलिया गांव पहुंचना है। डॉक्टर सिंह एक बार पहले भी हमें वहां ले जा चुके हैं। इस गांव में एन्सेफलाईटिस से कुछ बच्चों की मौत हो गई थी। होलिया पहुंचकर हमें पता चला था कि सरकार ने सन २००६ में जब पूरे पूर्वांचल में टीके लगवाने का दावा किया तब ना जाने क्यों इस गांव को छोड़ दिया। गांव के हालत देखकर साफ लगता है कि यहाँ कभी भी कोई भी बीमारी आसानी से पांव फैला सकती है। लेकिन अब डॉक्टर आर.एन.सिंह ने इस गांव को एन्सेफ्लाईटिस से मुक्त कराने का बीड़ा उठाया है। डॉक्टर सिंह यहाँ हर वो बात लागू करने वाले हैं जो वे पूरे देश में सरकार से लागू करवाना चाहते हैं। शुरुआत एक जनवरी से होगी। इस क्रम में होलिया के अलावा महाराजगंज का भी एक गांव डॉक्टर सिंह ने चुना है। आश्चर्य है.....पता नहीं किस बूते डॉक्टर सिंह दावा करते हैं कि अब इन गांवों में एन्सेफलाईटिस से एक भी बच्चा मरने नहीं पायेगा। जापानी एन्सेफलाईटिस के मच्छरों से बचाव के लिए डॉक्टर सिंह यहाँ फोग्गिंग करवाएंगे तो जलजनित एन्सेफलाईटिस से बचाव के लिए सूर्य की किरणों से पानी को शुद्ध करने की देशी तकनीक भी आजमाएंगे। गांव में एन्सेफलाईटिस मरीजों के लिए एक एम्बुलेंस भी होगी और जिन बच्चों की पहले मौत हो चुकी है उनके माँ -बाप को मुआवजा भी दिया जाएगा। लेकिन इन सबके के लिए धन कहाँ से आएगा। डॉक्टर सिंह इस सवाल का जबाब आध्यात्मिक अंदाज में देते हैं, "जिसका कोई नहीं उसका खुदा है यारों"। वैसे छपाक के सूत्रों से पता चला है कि डॉक्टर सिंह ने इस काम के लिए अपने परिवार की आमदनी का एक हिस्सा निकाला है और अपने शुभ चिंतकों को कुछ जिम्मेदारियां बांटी हैं। बहरहाल मुझ जैसे फक्कड़ से उन्होंने सिर्फ़ कुछ श्रमदान करने को कहा है जो हम जरूर करेंगे।

1 टिप्पणी:

  1. Holia chalo ek sandesh haius loktantra ko jo is awdharana par adharit hai ki 'democracy is of the people',for thepeople and by the people. lekin yahan kewal ek mantra 'by the people'ko hi sadha ja raha hai.Mahatma ke mahan "dandee-march"ko adarsh man kar poorvanchal se dimagi bukhar ko mukt karane ke liye hi yah satta ka sakaratmak-virodh hai Holia chalo movement.Dr R N Singh.

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